बिलासपुर 01 अप्रैल 2026।बिलासपुर में कानून की किताबें शायद अब नए संस्करण में छप रही हैं,जहां न्याय से पहले “सेटिंग” और जांच से पहले “वसूली” का अध्याय पढ़ाया जा रहा है। कोनी थाना क्षेत्र से सामने आई एक शिकायत ने इसी कथित “नई कार्यप्रणाली” पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राम सेमरताल निवासी देवकांत द्विवेदी (39 वर्ष) ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि कोनी थाना में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक उमेश उपाध्याय और आरक्षक उदय पाटले ने उनसे न सिर्फ अवैध वसूली की मांग की, बल्कि पैसे नहीं देने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी,अब सवाल ये है कि ये पुलिसिंग है या फिर कोई प्राइवेट “रिकवरी एजेंसी” का नया मॉडल?
शिकायत के मुताबिक, 17 मार्च 2026 को गांव के एक व्यक्ति की गांजा मामले में गिरफ्तारी के बाद 18 मार्च को द्विवेदी को फोन कर थाने बुलाया गया, वहां करीब दो घंटे तक “विशेष पूछताछ” चली,लेकिन असली “मुद्दा” तब सामने आया जब कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने उनसे पैसों की मांग शुरू कर दी, द्विवेदी का कहना है कि रकम नहीं देने पर उन्हें “मेमोरण्डम में फिट” करने की धमकी दी गई,यानि कानून की किताब अब शायद जरूरत के हिसाब से एडजस्ट हो रही है।
कहानी यहीं खत्म नहीं होती,आरोप है कि बाद में उन्हें लोहरापारा बुलाकर सीधे 2 लाख रुपये की मांग की गई और दो दिन का अल्टीमेटम भी दिया गया, बीच में रात 12 बजे फोन कॉल्स और फिर 24 मार्च को दोबारा बुलावा,जैसे कोई केस नहीं, बल्कि “डील” फाइनल हो रही हो।
इतना ही नहीं, 31 मार्च को दोनों पुलिसकर्मियों के पीड़ित के घर पहुंचने, गाली-गलौज करने और धमकाने के आरोप भी लगे हैं। शिकायत में तो यहां तक कहा गया है कि एक अधिकारी ने अपनी नौकरी के बचे महीनों का हवाला देते हुए पीड़ित को किसी बड़े अपराध में फंसाने और घर तक बुलडोजर चलवाने की धमकी दे डाली,यानि “कानून का राज” अब “खौफ का राज” बनने की कगार पर है।
पीड़ित, जो पेशे से किसान है, ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस विभाग इस “आरोपों की फाइल” को गंभीरता से खोलता है या फिर यह भी किसी मेज के कोने में धूल खाती रह जाएगी।
0 Comments