बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था का एक नया “मॉडल” सामने आया है,जहां फरियादी अगर न्याय मांगने जाए, तो उसे पहले सलाह दी जाती है कि “भाई, वकील लेकर आओ… और सीधे एसपी के पास जाओ!” यानी थाना सिर्फ दर्शक की भूमिका में है, और पीड़ित खुद ही अपनी लड़ाई लड़े,ताजा मामला सरयू विहार का है, जहां एक महिला ने हिम्मत जुटाकर थाना पहुंचकर आवेदन दिया,आरोप था कि पड़ोस में रहने वाले युवक उसकी पत्नी के साथ छेड़छाड़, गाली-गलौज और मारपीट जेसी हरकत कर रहे हैं। इतना ही नहीं, घटना का वीडियो भी मौजूद है,जो आजकल के दौर में सबसे मजबूत सबूत माना जाता है। महिला के पति ने यह वीडियो थाना प्रभारी को भी दिखाया,अब आम जनता को उम्मीद होती है कि पुलिस तुरंत कार्रवाई करेगी, आरोपियों को बुलाएगी, पूछताछ करेगी और कानून के अनुसार कदम उठाएगी, लेकिन सरकंडा थाना शायद इस “पुराने मॉडल” पर काम नहीं करता,यहां तो नया सिस्टम लागू है,बिट प्रभारी मौके पर पहुंचते हैं, निरीक्षण भी होता है, लेकिन कार्रवाई की जगह ज्ञान दिया जाता है: “आप एसपी से शिकायत करो… वकील के साथ जाओ… तब इनकी हेकड़ी निकल जाएगी!”
मतलब साफ है,थाना अब FIR दर्ज करने का केंद्र नहीं, बल्कि “कानूनी सलाह केंद्र” बन चुका है। जहां पीड़ित को न्याय नहीं, बल्कि अगला चक्कर लगाने की दिशा दिखाई जाती है।
व्यंग्य की बात तो यह है कि यहां पीड़ित ही धीरे-धीरे आरोपी बनता नजर आता है। सवाल यह उठता है कि जब वीडियो सबूत मौजूद है, निरीक्षण हो चुका है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं? क्या कानून अब आवेदन और साक्ष्य से नहीं, बल्कि “सिफारिश और दबाव” से चलेगा?
कालोनी के लोगों में चर्चा है कि इलाके में अवैध गतिविधियों पर भी ढील बरती जा रही है, जिससे पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या बिलासपुर पुलिस इस “व्यंग्यात्मक हकीकत” को गंभीरता से लेती है, या फिर सरकंडा थाना आगे भी ऐसे ही “सलाहकार मोड” में काम करता रहेगा।सूत्र बताते है कि अगली खबर में पूरे वीडियो के साथ हम मिलेंगे जाने कैसे शराब माफिया अपने घर को किराए के घर में अपनी अय्याशी का अड्डा बना रखे है ,सूत्रों के मुताबिक देखे पूरा वीडियो के साथ अगली खबर में ???
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