बिलासपुर 27 मार्च 2026।बिलासपुर थाना सिविल लाइन क्षेत्र में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के मामलों में फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की “तेज कार्रवाई” इन दिनों खुद सवालों के घेरे में है। एक ओर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने छह नामजद सटोरियों पर ₹5000-₹5000 का इनाम घोषित कर दिया है, तो दूसरी ओर ये सभी आरोपी अब भी खुलेआम “मैदान” में खेलते नजर आ रहे हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर कार्रवाई की बात जरूर कही जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक केवल एक आरोपी राजा बजाज की गिरफ्तारी कर पुलिस ने मानो “टॉस जीतकर बल्लेबाजी छोड़ दी” हो, बाकी आरोपी आखिर कहां हैं, यह सवाल अब आम लोगों के साथ-साथ जानकारों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।
सूत्रों की मानें तो जिन सटोरियों को पुलिस ढूंढने का दावा कर रही है, उनके मोबाइल नंबर अब भी चालू हैं। यानी “लोकेशन ऑन” है, लेकिन पुलिस की “लोकेशन” शायद अब भी ऑफलाइन है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पुलिस सच में इन तक नहीं पहुंच पा रही, या फिर पहुंचना ही नहीं चाहती?
व्यंग्य यही कहता है कि जैसे ही आईपीएल 2026 का सीजन 28 मार्च से शुरू होने वाला है, सटोरियों की “डिमांड” बढ़ गई है। ऐसे में कहीं ऐसा तो नहीं कि पुलिस भी “सीजन खत्म होने का इंतजार” कर रही हो? या फिर यह पूरी कार्रवाई महज कागजी “फील्डिंग सेटिंग” तक ही सीमित है?
जनता के बीच अब यह चर्चा आम है कि जब मोबाइल चालू हैं, ठिकाने भी लगभग तय हैं, तो फिर गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही? क्या यह तकनीकी अक्षमता है, या फिर “रणनीतिक चुप्पी”?
फिलहाल पुलिस की इस कार्रवाई ने सख्ती से ज्यादा संदेह को जन्म दिया है। इनाम घोषित कर देना आसान है, लेकिन असली परीक्षा तो तब होगी जब ये “फरार खिलाड़ी” सच में पुलिस की पकड़ में आएंगे वरना यह पूरा मामला “घोषणाओं की पारी” बनकर ही रह जाएगा।
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