बिलासपुर 26 दिसंबर 2025।बिलासपुर एक ओर केंद्र और राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर पहल कर रही है। ‘मां के नाम एक पेड़ जैसे अभियानों के जरिए आम लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। नगर निगम के अधिकारी और उनके संरक्षण में काम करने वाले ठेकेदार हरियाली को उजाड़ने में जुटे हुए हैं। ताजा मामला सरकंडा मुक्तिधाम के सामने का है, जहां व्यवसायिक गुमटी निर्माण के लिए हरे-भरे पेड़ की कटाई कर दी गई।
सरकंडा मुक्तिधाम के सामने सड़क किनारे लंबे समय से लगे पेड़ न केवल क्षेत्र की सुंदरता बढ़ा रहे थे, बल्कि आसपास के रहवासियों और आने-जाने वालों को छांव भी प्रदान करते थे। बावजूद इसके, अपने फायदे के लिए एक व्यक्ति ने बिना किसी सार्वजनिक सूचना और अनुमति के इन पेड़ को काट डाला। हैरानी की बात यह है कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी मौन बने रहे। निगम द्वारा समय-समय पर पौधरोपण के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और पर्यावरण बचाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब बात संरक्षण की आती है तो अधिकारी आंखें मूंद लेते हैं। लोगों का आरोप है कि व्यवसायिक हितों के लिए हरियाली को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। सरकारी जमीन पर लगे पेड़ों को इस तरह काटा जाएगा, तो मां के नाम पर पेड़ जैसे अभियानों का क्या औचित्य रह जाएगा। अब देखना यह है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी और जिन्होंने पेड़ की कटाई की है उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
0 Comments