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तारबाहर थाने से चकमा देकर फरार हुआ लूट का आरोपी,,होनहार आरक्षक ने मुखबिर की सूचना पर फिर पकड़ा, पुलिस की साख बची...

बिलासपुर, 07 अक्तूबर 2025।
शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच बिलासपुर पुलिस ने एक बार फिर अपनी तत्परता से भरोसा कायम किया है। तारबाहर थाना क्षेत्र में दयालबंद निवासी युवक से मारपीट कर लूट करने वाले आरोपी को पुलिस ने कल गिरफ्तार किया था, लेकिन रात के दौरान आरोपी पुलिस की पकड़ से चकमा देकर फरार हो गया था।घटना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। आरोपी के भागने की खबर मिलते ही एसएसपी रजनेश सिंह ने तत्काल सर्च अभियान के निर्देश दिए,कई टीमें गठित कर शहर के प्रमुख मार्गों, गली-मोहल्लों और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में दबिश दी गई।इसी बीच तारबाहर थाने के एक होनहार आरक्षक ने मुखबिर से मिली सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को फिर से धर दबोचा, आरक्षक की सूझबूझ और सतर्कता के चलते पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा पर आई आंच टल गई है।सूत्रों के अनुसार, आरोपी को लूट के आरोप में सोमवार सुबह  गिरफ्तार किया गया था। वह टिकारापारा का निवासी है,दयालबंद क्षेत्र में हुई लूटकांड में शामिल था। पुलिस जब उसे थाने 
 आई जिसके बाद रात में ही आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया,तभी आरोपी अंधेरे का लाभ उठाकर फरार हो गया था।आज शाम मुखबिर की सूचना पर तारबहार थाने के एक आरक्षक ने अकेले ही आरोपी को पहचानकर पकड़ लिया, पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश करने की कार्रवाई की जा रही है।सूत्र बताते है कि पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों का मानना है कि तारबाहर के आरक्षक ने तत्परता और कार्यकुशलता दिखाते हुए “फरार आरोपी को तुरंत पकड़ने में पुलिस ने बेहतरीन तालमेल दिखाया है। जिन्होंने सतर्कता से काम किया, उन्हें पुरस्कृत किया जाए, जबकि जिनसे चूक हुई है, उनके विरुद्ध कार्रवाई भी की जानी चाहिए।”
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि आखिर थानों में बंद आरोपियों की निगरानी में चूक क्यों हो रही है। यह तारबाहर पुलिस की लापरवाही मानी जाए या महज एक चूक इसका निर्णय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या उच्च अधिकारी इस मामले में दोषी कर्मियों पर सख्त कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी पहले की तरह ठंडे बस्ते में डालकर रफा-दफा कर दिया जाएगा।लेकिन इतना तय है कि एक आरक्षक की सूझबूझ ने पूरे पुलिस विभाग की साख बचा ली, वरना यह मामला बिलासपुर पुलिस की छवि पर गहरी चोट बन सकता था।

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