Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

Responsive Advertisement

सकरी थाने में खाकी की मौजूदगी में दबंगई! पीड़ितों से झूमाझटकी, जान से मारने की धमकी,थाना प्रभारी की भूमिका पर उठे सवाल...,थाने के भीतर युवक और उसकी पत्नी से बदसलूकी, बाहर भी गाली-गलौज करते रहे कार्यकर्ता, सहमा परिवार वीडियो बनाकर लगाता रहा जान बचाने की गुहार...


बिलासपुर 17 अक्तूबर 2026।बिलासपुर न्यायधानी में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। सकरी थाने के भीतर शुक्रवार रात करीब 10 बजे से 10:30 का बताया जा रहा है जहां भाजपा कार्यकर्ताओं और जनपद उपाध्यक्ष के साथियों पर युवक और उसकी पत्नी के साथ झूमाझटकी करने, गाली-गलौज करने तथा जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगे हैं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की भूमिका, विशेषकर थाना प्रभारी की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार रात कुछ भाजपा कार्यकर्ता और जनपद उपाध्यक्ष के साथी सकरी थाने पहुंचे थे। इसी दौरान थाने के भीतर मौजूद युवक और उसकी पत्नी के साथ कथित तौर पर झूमाझटकी की गई,स्थिति बिगड़ने पर पुलिसकर्मियों ने किसी तरह संबंधित लोगों को थाने से बाहर निकाला,हालांकि, इसके बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। आरोप है कि थाना परिसर में मौजूद कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार को गालियां देते हुए बाहर निकलने पर जान से मारने की धमकी दी, घटना के दौरान पीड़ित परिवार इस कदर भयभीत नजर आया कि वह वीडियो बनाकर अपनी जान बचाने की गुहार लगाता रहा, वहीं, थाने के गेट के बाहर खड़े लोग भी कथित तौर पर गाली-गलौज करते रहे, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिसकर्मियों की समझाइश के बावजूद कुछ लोग आक्रामक नजर आते हैं। हालांकि, पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।


थाना प्रभारी की भूमिका पर गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल सकरी थाना प्रभारी की भूमिका को लेकर उठ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, घटना के दौरान थाना प्रभारी अपने चेंबर में बैठे रहे। आरोप है कि उन्होंने बाहर आकर विवाद कर रहे लोगों को समझाने या स्थिति को नियंत्रित करने की प्रभावी पहल नहीं की, हालांकि, इस संबंध में थाना प्रभारी का पक्ष सामने आना बाकी है।

थाना आम नागरिकों के लिए सुरक्षा और न्याय की उम्मीद का स्थान होता है। ऐसे में यदि थाने के भीतर ही पीड़ित परिवार खुद को असुरक्षित महसूस करे और धमकियों का सामना करना पड़े, तो यह पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों के आधार पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कराते हैं या नहीं,साथ ही, थाना प्रभारी की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाती है या नहीं, इस पर भी लोगों की नजरें टिकी हैं।

Post a Comment

0 Comments