बिलासपुर 06 अप्रैल 2026।बिलासपुर शहर की सियासत और पुलिसिया कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। तारबाहर थाना क्षेत्र में देर रात बार पार्किंग में हुई मारपीट की घटना अब नया मोड़ लेती दिख रही है। इस पूरे मामले में बार संचालक तौसीफ खान का नाम चर्चा के केंद्र में है, जिनकी भूमिका को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।
घटना में सत्ता पक्ष से जुड़े एक व्यक्ति की जमकर पिटाई हुई,मामला थाने पहुंचा, शिकायत दर्ज हुई और धाराएं भी लगीं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कई दिन बीतने के बाद भी आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं। इस ढिलाई ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया, जब पिटाई का शिकार हुए व्यक्ति को कुछ ही दिनों में संगठन में नई जिम्मेदारी दे दी गई, शहर में अब यह चर्चा जोरों पर है कि यहां “मार खाने वालों को मौका” मिल रहा है। लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि यह कुटाई अब ‘कैरियर पैकेज’ बनती जा रही है।इसी बीच, तौसीफ खान की भूमिका को लेकर भी फुसफुसाहट तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो खान का नाम पहले भी “नेटवर्क” और “मैनेजमेंट” के मामलों में सामने आता रहा है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को लोग एक बड़े पैटर्न के रूप में देखने लगे हैं।
चर्चा यहां तक पहुंच गई है कि 31 दिसंबर 2024 की एक पुरानी घटना, जिसमें कथित “सेटिंग मॉडल” की बात सामने आई थी, उससे भी इस मामले को जोड़कर देखा जा रहा है। उस समय भी आरोप लगे थे कि कुछ लोगों के लिए सिस्टम अलग तरीके से काम करता है।अब सवाल यही उठ रहा है,जब आरोपी खुले घूम रहे हों,
पीड़ित को पद मिल रहा हो,और बार संचालक पर भी संदेह की परछाई हो,तो आखिर आम जनता किस पर भरोसा करे?बिलासपुर में यह मामला अब केवल मारपीट तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सिस्टम, सियासत और कथित ‘मैनेजमेंट’ के गठजोड़ की कहानी बनता जा रहा है।
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