बिलासपुर, 28 अप्रैल 2026।बिलासपुर में इन दिनों बोर खनन को लेकर जो ‘ड्रामा’ चल रहा है, उसमें नया ट्विस्ट तब आया जब एक बोर संचालक ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के पास पहुंचकर सरकंडा पुलिस पर डेढ़ लाख रुपए रिश्वत मांगने का आरोप जड़ दिया,सुनने में मामला गंभीर लगता है, लेकिन जरा पर्दे के पीछे झांकिए तो कहानी कुछ और ही इशारा करती नजर आती है। दरअसल, 6 अप्रैल को प्रशासन ने गर्मी और जल संकट को देखते हुए बोर खनन पर साफ-साफ ब्रेक लगा दिया था।
मतलब,“न बोर, न शोर”, लेकिन कुछ लोग शायद इस आदेश को ‘सलाह’ समझ बैठे और बिजौर गांव में धड़ल्ले से मशीनें गड़गड़ाने लगीं,नतीजा,सरकंडा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बोरवेल मशीन को रंगे हाथों पकड़ लिया, वो भी तहसीलदार की मौजूदगी में,अब जब खेल वहीं खत्म हो गया, तो कहानी ने नया मोड़ ले लिया,सूत्रों की मानें तो जिस बोर संचालक ने पुलिस पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया, वही खुद प्रतिबंध के बावजूद खनन में जुटा हुआ था। अब सवाल ये है,जब पकड़े गए, तो ‘रिश्वत कथा’ क्यों याद आई? क्या यह महज एक संयोग है या फिर कार्रवाई से बचने का नया फार्मूला? और कहानी यहीं खत्म नहीं होती,चर्चा यह भी है कि जिस गाड़ी से बोर खनन किया जा रहा था, वह तमिलनाडु नंबर की बताई जा रही है। यानी “लोकल मामला, लेकिन सेटिंग इंटरस्टेट!” ऊपर से एक कथित एजेंट, जो खुद को बिल्हा प्रेस क्लब का अध्यक्ष बताकर पुलिस को ‘प्रभावित’ करने की कोशिश कर रहा था, वह भी इसी बोर ऑपरेशन से जुड़ा बताया जा रहा है। अब इसे इत्तेफाक कहें या पूरी स्क्रिप्ट?सरकंडा पुलिस की बात करें तो हाल के दिनों में अवैध गतिविधियों पर लगातार सख्ती देखने को मिली है। ऐसे में अचानक से रिश्वत के आरोप लगना और वह भी ठीक उसी समय जब कार्रवाई हुई हो,थोड़ा “संदेहास्पद टाइमिंग” तो बनता है,व्यंग्य की भाषा में कहें तो मामला कुछ यूं लगता है,“पहले नियम तोड़ो, फिर पकड़े जाओ, और आखिर में आरोपों का तड़का लगाओ।” लेकिन कानून की किताब में यह स्क्रिप्ट ज्यादा दिन नहीं चलती,अब निगाहें एसएसपी स्तर की जांच पर टिकी हैं। अगर आरोप सही निकले तो कार्रवाई तय है, लेकिन अगर यह ‘रिश्वत कहानी’ महज एक बचाव की चाल साबित हुई, तो फिर कहानी काक्लाइमेक्स बोर संचालक के लिए भारी पड़ सकता है।फिलहाल इतना जरूर है कि इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि बिलासपुर में अब अवैध खनन करना आसान नहीं ,और पकड़े जाने के बाद कहानी गढ़ना तो उससे भी मुश्किल,..
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