बिलासपुर,मुंगेली 11 मार्च 206।मुंगेली जिले के पथरिया तहसील अंतर्गत प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल मदकू में जमीन के नामांतरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्राम मदकू के किसान अरुण चेलकर ने आरोप लगाया है कि उनकी लगभग 1.88 एकड़ कृषि भूमि का फर्जी दस्तावेजों के सहारे नामांतरण कराने की कोशिश की गई,जानकारी के अनुसार ग्राम मदकू के प.ह.न. 39 के अंतर्गत खसरा नंबर 345/1, 345/4 और 354 की जमीन से संबंधित नामांतरण का प्रकरण बिलासपुर के कुछ लोगों के नाम से पथरिया तहसील के अंतर्गत उप-तहसील सरगांव में दर्ज कराया गया था।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अतिरिक्त तहसीलदार सरगांव अतुल वैष्णव की ओर से जारी इश्तहार के माध्यम से किसान को इस नामांतरण प्रक्रिया की जानकारी मिली,इश्तहार देखने के बाद किसान अरुण चेलकर तत्काल तहसील कार्यालय पहुंचे और आपत्ति दर्ज कराते हुए साफ कहा कि उन्होंने अपनी जमीन किसी को बेची ही नहीं है और न ही किसी प्रकार की रजिस्ट्री कराई है। किसान का कहना है कि यदि समय रहते यह जानकारी नहीं मिलती तो उनकी जमीन किसी और के नाम हो सकती थी और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता,इस मामले में पथरिया के उप-पंजीयक (रजिस्ट्रार) कार्यालय का भी कहना है कि संबंधित खसरा नंबर की जमीन की कोई रजिस्ट्री उनके कार्यालय में दर्ज नहीं है और न ही इस संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है।
इससे पूरे मामले में फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने की साजिश की आशंका गहराने लगी है।
किसान का आरोप है कि उसके नाम से फर्जी आधार कार्ड तैयार कर और फर्जी गवाह खड़े कर जमीन का पंजीयन दर्शाने की कोशिश की गई है, इस पूरे मामले को लेकर किसान ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने कथित फर्जी नामांतरण कराने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार विवादित जमीन की खरीद प्रक्रिया किसी व्यक्ति विशेष के नाम से नहीं बल्कि DRS फर्म नामक फर्म के जरिए किए जाने की बात सामने आ रही है। वही सूत्र बताते हो कि इस फर्म में कृष्णा नाथानी, रवि मोटवानी सहित करीब 15 वैध साझेदार बताए जा रहे हैं। प्रमुख साझेदारों में सुनील छाबड़ा (सूर्या होटल), कबीर खुशलानी (भारत होजियरी), भूपेंद्र सिंह, नरेंद्र मोटवानी, शंकर बहरानी और अजय गुरवानी समेत अन्य नाम भी सामने आए हैं।
अब देखना होगा कि जमीन के इस कथित फर्जी नामांतरण प्रकरण में शामिल सफेदपोश और रसूखदार लोगों पर प्रशासन कब और क्या कार्रवाई करता है।
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