बिलासपुर 07 मई 2026।छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में आबकारी विभाग इन दिनों एक नियुक्ति को लेकर चर्चा और सवालों के केंद्र में है। मामला सहायक आबकारी अधिकारी स्तर के अधिकारी को जिला आबकारी उपायुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने का है। इस नियुक्ति के बाद विभागीय, प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या राज्य सरकार के पास आबकारी उपायुक्त स्तर के अधिकारियों की कमी हो गई है, जिसके कारण कनिष्ठ स्तर के अधिकारी को बिलासपुर जैसे बड़े और संवेदनशील जिले की कमान सौंपी गई, सूत्रों के अनुसार पिछले लगभग तीन वर्षों से जिले में सहायक आबकारी अधिकारी स्तर के अधिकारियों को ही प्रभारी जिम्मेदारी दी जाती रही है। ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या वास्तव में विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों का अभाव है या फिर इसके पीछे कोई और कारण मौजूद है।
बिलासपुर जिले में आबकारी विभाग की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। शराब कारोबार की निगरानी, राजस्व संग्रहण, अवैध शराब पर कार्रवाई और विभागीय नियंत्रण जैसी जिम्मेदारियां सीधे जिला आबकारी उपायुक्त के अधीन होती हैं। ऐसे महत्वपूर्ण पद पर वरिष्ठता और अनुभव को दरकिनार कर की गई नियुक्ति ने विभाग के भीतर भी असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है।
सूत्रों की मानें तो उक्त अधिकारी को किसी प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण का लाभ मिलने की चर्चा भी जोरों पर है। हालांकि इस पूरे मामले में सरकार या आबकारी विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि विभाग में वास्तव में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी है तो सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए,वहीं यदि यह नियुक्ति किसी विशेष दबाव या प्रभाव में की गई है, तो इससे विभागीय पारदर्शिता और अधिकारियों के मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
फिलहाल बिलासपुर आबकारी विभाग की यह नियुक्ति सवालों के घेरे में है और अब सबकी नजर राज्य सरकार की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।
0 Comments