बिलासपुर 20 फरवरी 2026।बिलासपुर में एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में स्थित लखीराम ऑडिटोरियम के पास कांग्रेस नेता त्रिलोक चंद श्रीवास के बेटे आदित्य प्रताप श्रीवास पर हुआ जानलेवा हमला न सिर्फ आपराधिक दुस्साहस को दर्शाता है, बल्कि पुलिस के तथाकथित “बिट सिस्टम” की नाकामी को भी उजागर करता है।
घटना शहर के व्यस्त और संवेदनशील माने जाने वाले इलाके में है, जानकारी के मुताबिक आदित्य अपने दोस्तों के साथ भेल खाने पहुंचा था कि तभी युग मिश्रा, वेदांत गुप्ता और अन्य युवक वहां पहुंचे, मामूली कहासुनी ने अचानक उग्र रूप ले लिया और आरोपियों ने चाकू से ताबड़तोड़ वार कर आदित्य को गंभीर रूप से घायल कर दिया, बीच-बचाव करने पहुंचे उसके दोस्तों को भी चोटें आईं,घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, घायल को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस इलाके में पुलिस के द्वारा नियमित गश्त और बीट सिस्टम की निगरानी का दावा किया जाता है, वहां युवक खुलेआम धारदार हथियार लेकर घूमते रहे और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी, बिट सिस्टम का उद्देश्य ही यह है कि हर मोहल्ले, चौक-चौराहे और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सतत निगरानी रखी जाए, असामाजिक तत्वों की पहचान पहले से की जाए और छोटे विवादों को बड़ी वारदात में बदलने से रोका जाए,लेकिन मौजूदा घटना ने यह संकेत दिया है कि सिविल लाइन पुलिस का बीट तंत्र केवल कागजी साबित हो रहा है। यदि सक्रिय निगरानी, नियमित गश्त और संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद यह हमला टल सकता था।
शहर में हाल के दिनों में बढ़ती चाकूबाजी और लूट की घटनाएं पुलिस की निवारक रणनीति पर प्रश्नचिन्ह लगा रही हैं। हर वारदात के बाद आरोपियों की तलाश और सख्त कार्रवाई की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आता है,अब जरूरत है कि पुलिस महज एफआईआर दर्ज करने तक सीमित न रहे, बल्कि अपने बिट सिस्टम की प्रभावी समीक्षा कर उसे वास्तविक रूप में लागू करे, ताकि आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।
0 Comments