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“दस मिनट में डंडा, रातभर में चुप्पी” सिविल लाइन पुलिस की दोहरी नीति पर सवाल...


बिलासपुर 14 फरवरी 2026।बिलासपुर शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में इन दिनों कानून के पालन की परिभाषा शायद घड़ी देखकर तय की जा रही है। भारती नगर चौक पर एक दिव्यांग दुकानदार की दुकान दस मिनट देर से बंद होने पर कथित रूप से सख्ती दिखाने वाली पुलिस, थाने से महज चंद कदमों की दूरी पर देर रात तक संचालित हो रहे “दिल्ली 6” जैसे ठेलों पर असाधारण उदारता क्यों बरत रही है,यह सवाल अब आम चर्चा का विषय बन चुका है।

नियम कहता है कि निर्धारित समय के बाद दुकानें बंद होंगी। लेकिन यदि कोई दुकान रातभर रौशन रहे और पुलिस की नजर न पड़े, तो इसे संयोग कहें या चयनात्मक दृष्टि? क्षेत्र में यह भी कानाफूसी है कि संबंधित प्रतिष्ठानों को लाइसेंस प्राप्त है। यदि ऐसा है तो उसकी सार्वजनिक पुष्टि क्यों नहीं? और यदि लाइसेंस नहीं है, तो कार्रवाई का अभाव किस कारण?
व्यंग्य यह है कि जिले के कप्तान अपनी सख्ती के लिए जाने जाते हैं, मगर उनके अधीन क्षेत्र में यह “रात की अर्थव्यवस्था” बेखौफ चलती दिखती है। सूत्र तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि कथित रूप से मासिक वसूली के एवज में संरक्षण दिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, पर सवाल उठना लाजिमी है,क्या नियम सिर्फ कमजोरों पर लागू होते हैं?
सभी व्यापारी अब यह जानना चाहते हैं कि कानून सबके लिए समान है या फिर कुछ दुकानों के लिए विशेष “रात्रि छूट” योजना लागू है। सिविल लाइन पुलिस यदि पारदर्शिता से स्थिति स्पष्ट करे तो भ्रम दूर हो सकता है। अन्यथा, यह व्यंग्य ही सच्चाई का आईना बनता रहेगा।

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