बिलासपुर 18 फरवरी 2026।बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र स्थित राजकिशोर नगर में रात लगभग 9 बजे हुई ज्वेलर्स से लूट की वारदात ने एक बार फिर पुलिस के दावों की चमक उतार दी है। जिस शहर में पुलिस “चौकन्ना बिट सिस्टम” का ढोल पीटती है, वहीं व्यस्त इलाके में एक सराफा व्यापारी से लाखों-करोड़ों के जेवर लूट लिए जाते हैं और सिस्टम मूकदर्शक बना रहता है।
जानकारी के अनुसार, ज्वेलर्स संतोष तिवारी अपनी कार से घर जा रहे थे, तभी बदमाशों ने उन्हें निशाना बनाया। सवाल सीधा है,जब रात 9 बजे का समय पुलिस की नजर में “संवेदनशील पेट्रोलिंग आवर” माना जाता है, तब बिट सिस्टम आखिर किस गली में टहल रहा था? क्या वह भी ट्रैफिक की तरह जाम में फंसा था या फिर सिर्फ कागजों में गश्त कर रहा था?
बड़े-बड़े दावे, प्रेस नोट और बैठकों में अपराध पर लगाम कसने की बातें,सब कुछ सुनने में जितना प्रभावशाली लगता है, जमीन पर उतना ही हल्का साबित हो रहा है। शहर में चर्चा है कि स्पेशल टीम अपराधियों से ज्यादा “वसूली अभियान” में दक्ष है। अपराधी वारदात कर निकल जाते हैं और पुलिस बाद में सीसीटीवी फुटेज के सहारे “जांच जारी है” का राग अलापती रह जाती है।
याद कीजिए, याद कीजिए कि जिले से लगे रतनपुर थाना क्षेत्र में करीब तीन माह पहले सराफा व्यापारी से लगभग एक करोड़ की उठाईगिरी हुई थी। तब भी पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों की पहचान हो चुकी है। मगर पहचान के बाद भी गिरफ्तारी नहीं,क्या यह कोई नई कानूनी प्रक्रिया है या फिर “पहचान परेड” ही अंतिम उपलब्धि मानी जा रही है?
लगातार बढ़ती घटनाएं यह सवाल उठाने को मजबूर करती हैं कि क्या पुलिस व्यवस्था सिर्फ मीटिंग, मॉनिटरिंग और मीडिया मैनेजमेंट तक सीमित हो गई है? आम नागरिक और व्यापारी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अपराधी बेखौफ हैं और सिस्टम कागजी सक्रियता में व्यस्त,अब देखना यह है कि पुलिस कुंभकरणी नींद से कब जागेगी,या फिर अगली वारदात के बाद फिर वही बयान आएगा, “टीम गठित कर दी गई है, जल्द खुलासा होगा…”?
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