बिलासपुर 01 सितम्बर 2026।बिलासपुर शहर में इन दिनों चाकू सिर्फ जेब में नहीं, बल्कि आम आदमी के डर में भी नजर आने लगा है। गली-मोहल्लों से लेकर बाजार और प्रमुख इलाकों तक चाकूबाजी की घटनाएं लगातार सुर्खियां बन रही हैं। हर घटना के बाद पुलिस सक्रिय होती है, आरोपी पकड़े जाते हैं, चाकू जब्त होता है और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की खबर सामने आती है। लेकिन इसके बाद कहानी फिर वहीं लौट आती है,एक नई घटना, नया आरोपी, नया चाकू और नई FIR,शहर के तोरवा, सिरगिट्टी, सिविल लाइन, सरकंडा और कोनी जैसे थाना क्षेत्रों में चाकूबाजी की घटनाएं अब लोगों के लिए चौंकाने वाली खबर नहीं रह गई हैं। सवाल यह नहीं कि अगली चाकूबाजी कब होगी, बल्कि सवाल यह बन गया है कि अगली खबर शहर के किस थाना क्षेत्र से आएगी? पुलिस की कार्रवाई पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि अपराध होने के बाद कार्रवाई और अपराध होने से पहले रोकथाम,दोनों में जमीन-आसमान का अंतर दिखाई देता है। पुलिस हर बार हथियार बरामद कर अपनी पीठ थपथपा सकती है, लेकिन जनता पूछ रही है कि ये चाकू अपराधियों की जेब तक पहुंचने से पहले पुलिस की नजर तक क्यों नहीं पहुंचते?
व्यंग्यात्मक तौर पर कहें तो शहर में पुलिस की व्यवस्था कुछ ऐसी नजर आ रही है,पहले चाकू चलेगा, फिर पुलिस आएगी; पहले हमला होगा, फिर FIR होगी; पहले दहशत फैलेगी, फिर आर्म्स एक्ट लगेगा, यानी सुरक्षा व्यवस्था मानो अपराधी के एक्शन के बाद अपना रिएक्शन देने में ही व्यस्त है। हालात यह हैं कि आम नागरिक अब रात में ही नहीं, दिन में भी सड़क पर निकलते समय सतर्क रहने को मजबूर है। लोगों के मन में यह डर बना हुआ है कि किसी मामूली विवाद, कहासुनी या रास्ते के झगड़े में सामने वाला चाकू निकाल दे तो क्या होगा?सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस की जिम्मेदारी सिर्फ चाकू बरामद करने और आर्म्स एक्ट लगाने तक सीमित है? यदि नहीं, तो फिर शहर में चाकूबाजी रोकने के लिए वह प्रभावी अभियान कहां है, जिसका असर अपराधियों में दिखाई दे? पुलिस के पास पेट्रोलिंग है, मुखबिर तंत्र है, अपराधियों का रिकॉर्ड है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की जिम्मेदारी भी है। फिर भी अगर चाकू लगातार सड़कों पर निकल रहे हैं तो कहीं न कहीं रोकथाम की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जनता को आंकड़े नहीं, नतीजे चाहिए, कितने चाकू जब्त हुए, कितने आर्म्स एक्ट लगे और कितने आरोपी पकड़े गए,इनसे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि अगली चाकूबाजी कब रुकेगी, क्योंकि जनता को ऐसी पुलिसिंग नहीं चाहिए जिसमें हर वारदात के बाद पुलिस जागे और अगली वारदात तक फिर सो जाए,
अब देखना यह है कि इस लगातार बढ़ती चाकूबाजी पर पुलिस विभाग वास्तव में संज्ञान लेकर कोई ठोस रणनीति जमीन पर उतारता है या फिर बिलासपुर की जनता को इसी तरह “चाकू चलेगा, FIR होगी, आर्म्स एक्ट लगेगा और फिर सब सामान्य हो जाएगा” वाली व्यवस्था के साथ जीने की आदत डालनी पड़ेगी,
फिलहाल शहर का सवाल सीधा है,पुलिस चाकू पकड़ रही है, लेकिन क्या चाकूबाजी भी पकड़ पाएगी?
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