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करोड़ों की जमीन पर फर्जीवाड़े का आरोप, आरोपी को थाने से ही राहत!...,बुजुर्ग की शिकायत पर मस्तूरी पुलिस ने दर्ज किया अपराध, महिला आरोपी को पकड़ा भी… फिर पूछताछ के बाद छोड़ दिया; ‘जांच पूरी नहीं’ का हवाला, कार्रवाई पर उठे सवाल...

बिलासपुर 14 सितंबर 2026।बिलासपुर करोड़ों की जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में मस्तूरी पुलिस की कार्रवाई अब खुद सवालों के घेरे में है। गंभीर आरोपों में अपराध दर्ज करने के बाद पुलिस ने जिस आरोपी महिला को पकड़कर थाने में पूछताछ की, उसे कुछ देर बाद ही छोड़ दिया, पुलिस का तर्क है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब शिकायत के साथ दस्तावेज पुलिस को सौंपे गए, अपराध भी दर्ज कर लिया गया और आरोपी को पूछताछ के लिए थाने लाया गया, तो फिर उसे छोड़ने की इतनी जल्दी क्यों दिखाई गई?
मामला लिंक रोड निवासी 70 वर्षीय कृष्णा दुआ की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक उनके परिवार के नाम अमेरी, चोरभट्टी, तोरवा, फदहाखार और लिंक रोड क्षेत्र में जमीनें हैं। आरोप है कि अप्रैल 2022 में सीए अनिल टुटेजा और उनकी सहयोगी दुर्गेश नंदनी बुजुर्ग बृजमोहन दुआ को मस्तूरी स्थित उप पंजीयक कार्यालय लेकर गए थे।
परिजनों का आरोप है कि उस समय बृजमोहन दुआ गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रहे थे। इसी स्थिति का कथित रूप से फायदा उठाकर वसीयतनामा तैयार कराया गया,आरोप यह भी है कि बृजमोहन दुआ की मृत्यु के बाद इसी दस्तावेज के आधार पर जमीनों पर कब्जे की कोशिश की गई,मामले की जानकारी मिलने के बाद कृष्णा दुआ ने विभागीय स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई और दस्तावेज जुटाकर मस्तूरी थाने में शिकायत की, शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी, षड्यंत्र और कूटरचना सहित गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की,जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी दुर्गेश नंदनी को पकड़कर थाने लाया और पूछताछ की,लेकिन कुछ समय बाद उसे छोड़ दिया गया,यही पुलिसिया कार्रवाई अब चर्चा का विषय बन गई है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मामला जमीन और कथित फर्जी दस्तावेजों से जुड़ा है, ऐसे में आरोपी को थाने से छोड़ने से जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

एफआईआर हुई, गिरफ्तारी हुई और फिर रिहाई भी…

मस्तूरी पुलिस की कार्रवाई को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मामला इतना गंभीर था कि अपराध दर्ज कर आरोपी को थाने बुलाकर पूछताछ करनी पड़ी, तो जांच पूरी होने से पहले उसे छोड़ने का आधार क्या रहा? क्या पुलिस ने कथित वसीयतनामा, मेडिकल दस्तावेज, रजिस्ट्री रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेजों की पर्याप्त जांच कर ली है? या फिर करोड़ों की जमीन के इस विवाद में कार्रवाई अभी सिर्फ कागजी खानापूर्ति तक सीमित है?
फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच जारी है। लेकिन करोड़ों की संपत्ति से जुड़े इस मामले में शिकायतकर्ता परिवार अब पुलिस की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। देखना होगा कि मस्तूरी पुलिस जांच को किस दिशा में ले जाती है और कथित फर्जी दस्तावेजों की हकीकत सामने लाने के साथ जिम्मेदार लोगों पर ठोस कार्रवाई कब होती है।

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