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SDM के स्थगन पर भारी तहसीलदार का नामांतरण आदेश? राजस्व दफ्तर में ‘नियम’ से ज्यादा चल रही कथित जुगलबंदी!...



बिलासपुर 19 अगस्त 2026।बिलासपुर राजस्व विभाग में नियम-कायदे और अधिकारियों के आदेशों की अपनी अहमियत होती है, लेकिन ग्राम मेण्ड्रा के खसरा नंबर 154/1 से जुड़ा मामला इन दिनों इन्हीं व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) द्वारा स्थगन आदेश जारी किए जाने के बावजूद तहसील स्तर पर नामांतरण की कार्रवाई कर दी गई, मामला सामने आने के बाद अब राजस्व अमले की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों और किसानों में नाराजगी है। जानकारी के अनुसार, न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के ज्ञापन क्रमांक 610/अ.वि.अ./2026, दिनांक 8 जून 2026 के तहत ग्राम मेण्ड्रा स्थित खसरा नंबर 154/1 में विक्रय, नामांतरण एवं निर्माण कार्य पर आगामी आदेश तक रोक लगाए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद सकरी तहसीलदार द्वारा नामांतरण आदेश पारित किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि संबंधित पटवारी के प्रतिवेदन और एसडीएम के आदेश को नजरअंदाज कर कार्रवाई की गई,
मामले ने तब और तूल पकड़ा, जब कथित तौर पर सकरी तहसीलदार नामांतरण आदेश पारित कर अभिलेख दुरुस्ती क्रेता का नाम दर्ज करने के लिए कर्मचारी पर दबाव बनाए जाने की बात सामने आई,बाद में इसे ‘त्रुटिवश आदेश पारित होना’ बताते हुए पुनर्विलोकन की प्रक्रिया अपनाए जाने की चर्चा है। सवाल यही है कि यदि आदेश वास्तव में त्रुटिवश हुआ था, तो स्थगन आदेश के रहते नामांतरण की नौबत आई ही कैसे?
ग्रामीणों का आरोप है कि पांड, सैदा, मेण्ड्रा सहित अन्य गांव जो निगम सीमा से बाहर के क्षेत्रों में राजस्व मामलों को लेकर लंबे समय से शिकायतें हैं। आरोप तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि अवैध प्लॉटिंग वाले मामलों में नामांतरण के लिए कथित रूप से 20 से 50 हजार रुपये और सामान्य नामांतरण में 10 से 15 हजार रुपये तक की मांग की जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनके सत्यापन के लिए जांच आवश्यक है। शिकायतकर्ताओं ने राजस्व कार्यालय में एक कथित ‘जुगलबंदी’ का भी आरोप लगाया है, जिसमें निचले स्तर कि महिला कर्मचारी और कार्यालय से जुड़े लोग कथित तौर पर पक्षकारों पर दबाव बनाते हैं। आरोप है कि CT सीरीज मे आवेदन समय-सीमा में काम नहीं पहुंच पाने पर अपूर्ण दस्तावेज का हवाला देते हुए प्रकरण खारिज कर दिए जाते हैं। दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच विभिन्न पटवारी हलकों में बड़ी संख्या में खसरों को लेकर कथित अवैध वसूली के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ मामलों में लाखों रुपये तक की रकम मांगे जाने की बातें सामने आई हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यही है,यदि राजस्व व्यवस्था में आदेशों की सीढ़ी तय है, तो क्या नीचे की एक सीढ़ी ऊपर के आदेश को नजरअंदाज कर सकती है? ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित रिकॉर्ड की जांच और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

वही सूत्र बताते है कि इस पुरे मामले मे एक महिला कर्मचारी कि अहम् भूमिका हैं।

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