बिलासपुर 15 अगस्त 2026।बिलासपुर शहर में बढ़ती चाकूबाजी की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हालात देखकर ऐसा लग रहा है कि अपराधियों के मन से कानून का डर धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। एक के बाद एक चाकूबाजी की वारदातें सामने आ रही हैं और आम नागरिक अब सड़क पर निकलने से पहले यह सोचने को मजबूर है कि कहीं किसी मामूली विवाद में चाकू न निकलआए,विडंबना यह है कि बिलासपुर पुलिस के कप्तान की सख्ती के किस्से लगातार सुनाई देते हैं। पुलिस अपराधियों पर कार्रवाई के दावे भी करती है, अभियान भी चलाती है और आरोपियों को पकड़कर अपनी पीठ भी थपथपाती है। लेकिन शहर में चाकूबाजी की घटनाओं का बढ़ता ग्राफ इन दावों को आईना दिखाता नजर आ रहा है। अगर सख्ती इतनी ही असरदार है तो अपराधियों के हाथों में चाकू इतनी आसानी से क्यों दिखाई दे रहा है? जानकारों के मुताबिक पिछले दिनों में शहर और आसपास के क्षेत्रों में चाकूबाजी की एक दर्जन से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। इनमें चाकू से हत्या जैसी गंभीर वारदात भी शामिल है। यानी मामला अब केवल मारपीट या आपसी विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चाकू जैसे हथियारों का इस्तेमाल जान लेने तक पहुंच गया है। हर घटना के बाद पुलिस की सक्रियता दिखाई देती है। आरोपी पकड़े जाते हैं, हथियार बरामद होते हैं और कार्रवाई की जानकारी सामने आती है। लेकिन कुछ ही समय बाद किसी दूसरे इलाके से चाकूबाजी की खबर आ जाती है। ऐसे में आम जनता के मन में सवाल उठना लाजिमी है,क्या पुलिस अपराधियों को पकड़ रही है या सिर्फ घटनाओं के बाद अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है? जानकारों की माने तो हाल ही में साउथ बिहार ट्रेन में चेकिंग के दौरान धारदार हथियारों के साथ कुछ लोगों को पकड़कर कार्रवाई की गई,पुलिस की यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह है कि ट्रेन में हथियार पकड़ने वाली पुलिस शहर की गलियों में घूम रहे संभावित चाकूबाजों पर पहले से शिकंजा क्यों नहीं कस पा रही? शहरवासियों के बीच अब चर्चा है कि आखिर पुलिस की वह ‘सख्ती’ कहां है, जिसकी तस्वीरें और कार्रवाई के दावे अक्सर सामने आते हैं? क्या पुलिस का खौफ अपराधियों के बीच है या फिर सिर्फ प्रेस नोट में? बिलासपुर जैसे शहर में लगातार बढ़ती चाकूबाजी बेहद गंभीर चिंता का विषय है। आम जनता को सुरक्षा चाहिए, कार्रवाई की खबरें नहीं,अब देखने वाली बात होगी कि पुलिस इस बढ़ती चाकूबाजी पर वास्तव में कब अंकुश लगा पाती है,वरना हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में शहर का सवाल बेहद कड़वा होगा,सड़कों पर जनता सुरक्षित है या चाकू लेकर घूमने वाले अपराधी?
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