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बिलासपुर प्रेस क्लब में 'माता तीजन बाई सम्मान' का पोस्टर विमोचित, इस बार संघर्षरत महिला कलाकारों को भी मिलेगा सम्मान...


बिलासपुर 04 जुलाई 2026।बिलासपुर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला, पंडवानी परंपरा और संघर्षरत कलाकारों के सम्मान को समर्पित 'माता तीजन बाई सम्मान' के दूसरे संस्करण का पोस्टर मंगलवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में भव्य रूप से विमोचित किया गया, इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी फिल्म जगत और पत्रकारिता जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं,
पोस्टर विमोचन समारोह में छत्तीसगढ़ी फिल्म अभिनेत्री सोनाली सहारे, माता तीजन बाई की पोती भावना, वरिष्ठ छत्तीसगढ़ी कलाकार लता राही, वरिष्ठ फिल्म कलाकार एवं माता तीजन बाई सम्मान समिति के अध्यक्ष अलीम बंशी के साथ बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अजीत मिश्रा, उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी, कोषाध्यक्ष किशोर सिंह, सहसचिव हरिकिशन गंगवानी और कार्यकारिणी सदस्य कैलाश यादव उपस्थित रहे।

समिति अध्यक्ष अलीम बंशी ने बताया कि इस सम्मान का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, विशेषकर पंडवानी विधा को नई पहचान दिलाने के साथ उन कलाकारों का सम्मान करना है, जिन्होंने वर्षों तक कला साधना की, लेकिन उन्हें अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी,उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष आयोजित समारोह में 40 से अधिक पंडवानी कलाकारों को सम्मानित किया गया था, जबकि इस वर्ष 30 पंडवानी कलाकारों को सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है।
इस वर्ष आयोजन की सबसे खास पहल संघर्षरत महिला कलाकारों को सम्मानित करना होगी, समिति के अनुसार, छत्तीसगढ़ी फिल्मों में 14 से 18 फिल्मों तक अभिनय करने वाली ऐसी 10 महिला कलाकारों का चयन किया गया है, जिन्हें अब तक किसी बड़े सम्मान या पुरस्कार से नहीं नवाजा गया। इन सभी कलाकारों को स्वयं माता तीजन बाई के नाम पर सम्मानित किया जाएगा,कार्यक्रम के दौरान सम्मान के लिए नामांकित अभिनेत्री सोनाली सहारे ने कहा कि उनके लिए यह सम्मान गर्व और सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि माता तीजन बाई जैसी महान लोककलाकार के नाम से सम्मानित होना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने पंडवानी को देश-विदेश तक पहचान दिलाने में माता तीजन बाई के संघर्ष और योगदान को प्रेरणादायी बताया,आयोजन समिति ने बताया कि 'माता तीजन बाई सम्मान समारोह' का आयोजन रायपुर में किया जाएग, समिति का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल सम्मान समारोह आयोजित करना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के कोने-कोने तक लोक कलाकारों के सम्मान और उनकी कला के प्रति समाज में जागरूकता एवं सम्मान की भावना को मजबूत करना है।

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