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सरयू विहार कॉलोनी में लेआउट से छेड़छाड़ का आरोप, आरक्षित भूमि बिक्री और नाली मोड़ने के मामले में थाने पहुंची शिकायत...


बिलासपुर 03 जुलाई 2026।बिलासपुर शहर की सरयू विहार कॉलोनी एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। कॉलोनीवासियों ने रामानंद गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित, बिलासपुर पर स्वीकृत लेआउट में कथित छेड़छाड़, आरक्षित भूमि के नियमों का उल्लंघन और जल निकासी व्यवस्था बदलने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के बाद पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार सरयू विहार कॉलोनी का डायवर्सन एवं लेआउट वर्ष 2004 में सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति से पारित किया गया था। स्वीकृत नक्शे के अनुसार कॉलोनी की कुल भूमि में 15 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए तथा 10 प्रतिशत भूमि पार्क के लिए आरक्षित रखी गई थी,आरोप है कि अब इन आरक्षित भूखंडों को बेचने की तैयारी की जा रही है, जो स्वीकृत लेआउट और संबंधित नियमों का सीधा उल्लंघन है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि गुलाब नगर निवासी आर.एन. तिवारी द्वारा कॉलोनी की वर्षा जल एवं नाली की निकासी व्यवस्था में मनमाने ढंग से बदलाव किया गया। कॉलोनी में लगभग 0.6 मीटर चौड़ी स्वीकृत नाली को तोड़कर उसकी दिशा बदल दी गई, जिसके कारण आसपास की कई कॉलोनियों का गंदा पानी सरयू विहार क्षेत्र की ओर आने लगा है।
कॉलोनीवासियों का कहना है कि वर्तमान में गोकुल धाम, गायत्री परिसर, गड्ढेवाला कॉलोनी और सूर्य विहार फेज-2 सहित अन्य क्षेत्रों का नाली का पानी भी प्रभावित हिस्से में पहुंच रहा है। इससे बारिश के दौरान जलभराव, गंदगी और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधारी गई तो भविष्य में कॉलोनीवासियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि नगर एवं ग्राम निवेश विभाग द्वारा स्वीकृत मूल लेआउट के अनुरूप ही जल निकासी व्यवस्था बहाल की जाए, पार्क और ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित भूमि की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए,
सूत्रों के मुताबिक इस शिकायत की प्रतिलिपि स्थानीय विधायक तथा संबंधित नगर निगम पार्षद को भी भेजी गई है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस प्रकार की जाती है और दोष पाए जाने पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

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