बिलासपुर 19 जून 2026।बिलासपुर प्रदेश के सबसे चर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले में बिलासपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 नए मामलों में एफआईआर दर्ज कर ली है। इसके साथ ही अब तक सामने आए सभी 17 संदिग्ध प्रकरणों में अपराध दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के जरिए 70 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है।
जानकारी के अनुसार इससे पहले तीन मामलों में अलग-अलग थानों में अपराध दर्ज किया जा चुका था। जांच के दौरान मिले नए तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर 14 और मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई प्रारंभिक जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर की गई है और मामले की गहन जांच जारी है।
नए दर्ज मामलों में पांच एफआईआर सरकंडा थाना क्षेत्र में, तीन मामले कोनी थाना, तीन सिविल लाइन थाना, एक तोरवा थाना और एक मामला सिटी कोतवाली थाना में दर्ज किया गया है। सभी मामलों में अलग-अलग आरोपियों के खिलाफ अपराध कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार इस फर्जीवाड़े में केवल आवेदक ही नहीं बल्कि डॉक्टर, वकील और मृतकों के परिजनों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इसी आधार पर कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी बारीकी से जांच की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे किए जा सकते है।
गौरतलब है कि इस मामले को बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था। विधानसभा में यह तथ्य सामने आया था कि छत्तीसगढ़ के नागलोक कहे जाने वाले जशपुर जिले से भी अधिक सर्पदंश से मौत के मामले बिलासपुर में दर्ज किए गए हैं। इसके बाद शासन और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई। जांच आगे बढ़ने पर कथित फर्जी मौतों और मुआवजा दावों का बड़ा नेटवर्क सामने आया, जिसके बाद अब लगातार एफआईआर और कार्रवाई का दौर जारी है। पुलिस का दावा है कि जांच पूरी होने पर इस घोटाले से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं।
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