बिलासपुर 17 मई 2026।बिलासपुर कहते हैं जब उम्मीदें टूटने लगती हैं, तब इंसान केवल दुआ और चमत्कार का सहारा खोजता है। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला चमत्कार एक बार फिर बिलासपुर के श्री शिशु भवन हॉस्पिटल में देखने को मिला, जहाँ डॉक्टरों की अथक मेहनत, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और समर्पित सेवा भावना ने 850 ग्राम के एक गंभीर प्रीमैच्योर नवजात को नया जीवन दे दिया,जानकारी के अनुसार 30 मार्च 2026 को 28 सप्ताह में जन्मे अत्यंत गंभीर नवजात को अस्पताल में भर्ती कराया गया,बच्चे के पिता शिव कुमार मानकर एवं माता सुभाषिनी मानकर, निवासी गायत्री नगर मीरपेठ हैदराबाद, अपने बच्चे की हालत देखकर पूरी तरह निराश हो चुके थे। जन्म के समय बच्चे का वजन मात्र 850 ग्राम था।
समय से पहले जन्म लेने के कारण उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं थे, हृदय संबंधी जटिल समस्याएं थीं, मस्तिष्क में रक्तस्राव हो रहा था तथा संक्रमण लगातार बढ़ रहा था।ऐसी गंभीर परिस्थिति में अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. श्रीकांत गिरी एवं उनकी विशेषज्ञ टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया, नवजात की हर सांस पर 24 घंटे निगरानी रखी गई,प्रारंभिक दिनों में बच्चे को हाई ऑक्सीजन फ्लो सपोर्ट पर रखा गया, बाद में आवश्यकता अनुसार वेंटिलेटर सहायता एवं अन्य जीवनरक्षक उपचार दिए गए,लगातार निगरानी, आधुनिक मशीनों और डॉक्टरों-नर्सिंग स्टाफ की अथक मेहनत से धीरे-धीरे बच्चे की हालत में सुधार होने लगा,करीब डेढ़ महीने तक चले संघर्ष और कई जटिल चिकित्सीय प्रक्रियाओं के बाद आखिरकार 17 मई 2026 को नवजात को पूरी तरह स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई,अपने बच्चे को स्वस्थ गोद में लेकर माता-पिता की आंखें खुशी से छलक उठीं,डॉ. श्रीकांत गिरी ने बताया कि 1 किलोग्राम से कम वजन और 28 सप्ताह में जन्मे बच्चों का उपचार बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे नवजातों को बचाने के लिए अत्याधुनिक मशीनों, विशेष दवाइयों, संक्रमण नियंत्रण और अनुभवी टीम की आवश्यकता होती है,उन्होंने कहा कि बिलासपुर जैसे शहर में इतनी गंभीर स्थिति वाले नवजात को स्वस्थ कर घर भेज पाना पूरी टीम की बड़ी उपलब्धि है।
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