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"थाने के ‘महारथी’,जहां कानून भी एंट्री से पहले परमिशन लेता है!”...


बिलासपुर 25 मार्च 2026।बिलासपुर में एक तरफ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह अपराध पर लगाम कसने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनके ही विभाग के कुछ “विशेष प्रतिभाशाली” कर्मचारी व्यवस्था को अपने अंदाज में चला रहे हैं। शहर के एक थाने में पिछले तीन साल से भी ज्यादा समय से जमे दो ऐसे महारथी इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं, जिनकी पकड़ इतनी मजबूत बताई जा रही है कि वहां कानून भी शायद पहले इजाजत लेकर ही दाखिल होता होगा।
सूत्रों के अनुसार, इस थाने में बिना इनकी स्वीकृति के कुछ भी संभव नहीं,अवैध कारोबार जैसे गांजा, शराब, जुआ,ये सब मानो इनके “प्रोटेक्शन प्लान” के तहत संचालित हो रहे हैं। मजे की बात यह है कि सब कुछ आंखों के सामने होने के बावजूद दोनों की मासूमियत ऐसी कि जैसे उन्हें कुछ पता ही न हो, अभिनय ऐसा कि बड़े-बड़े कलाकार भी पानी भरें।
अगर कोई इनकी शिकायत करने की हिम्मत कर बैठे, तो कहानी में नया ट्विस्ट आ जाता है। ये महारथी तुरंत रणनीतिकार बन जाते हैं और शिकायतकर्ता के विरोधियों को “फ्री कंसल्टेंसी” देने लगते हैं,कैसे और कहां शिकायत करनी है, किसे फंसाना है, सबका पूरा ब्लूप्रिंट तैयार, यानी यहां खेल सिर्फ कानून का नहीं, दिमाग का भी है।
सूत्र बताते हैं कि इनका असली काम अपराध रोकना नहीं, बल्कि “आर्थिक प्रवाह” बनाए रखना है। वसूली का तंत्र इतना व्यवस्थित है कि किसी कॉर्पोरेट मैनेजमेंट क्लास में केस स्टडी बन जाए,काम कम, कमाई ज्यादा,यही इनकी सफलता का फॉर्मूला है।
अब सवाल उठता है कि जब थाने के भीतर ही ऐसे “मैनेजमेंट गुरु” सक्रिय हों, तो अपराधियों को डर किस बात का होगा? तीन साल से एक ही जगह जमे इन महारथियों पर आखिर विभागीय नजर कब पड़ेगी, या फिर ये ‘सेवा’ यूं ही चलती रहेगी?
शहर में फिलहाल यही चर्चा है कि अपराध से जंग अब सड़कों पर नहीं, बल्कि थानों के अंदर लड़ी जानी चाहिए।

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