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सिविल लाइन में सट्टे पर स्ट्राइक, सिरगिट्टी में सटोरियों की ओपन नेट प्रैक्टिस, कार्रवाई ‘सिलेक्टिव’ क्यों?...


बिलासपुर 08 जनवरी 2026।बिलासपुर पुलिस द्वारा ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सिविल लाइन थाना पुलिस ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करते हुए दो सटोरियों को गिरफ्तार कर यह दिखाने की कोशिश की है कि कानून अब सख्ती के मूड में है। ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग के दौरान ऑनलाइन सट्टा खिलाते पकड़े गए आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट और नगद रकम की बरामदगी कर पुलिस ने अपनी सक्रियता दर्ज कराई है। इस कार्रवाई को पुलिस की उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा है।
लेकिन इस कार्रवाई के बाद एक बड़ा और असहज सवाल खड़ा हो गया है, क्या यह सख्ती पूरे बिलासपुर में एक जैसी है, या फिर थाना सीमा देखकर कानून की धार बदल जाती है?अगर सिविल लाइन क्षेत्र में ऑनलाइन सट्टा पकड़ में आ सकता है, तो सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में खुलेआम चल रहे सट्टे पर अब तक शिकंजा क्यों नहीं कस पाया? स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिरगिट्टी क्षेत्र में दीपक मानिकपुरी खुद को “सिरगिट्टी का सट्टा किंग” बताकर बेखौफ अंदाज़ में सट्टा कारोबार चला रहा है। यही नहीं, यदुदंडन नगर क्षेत्र में ‘पेंटर’ नाम से चर्चित सटोरिया भी इन दिनों चर्चा में है, जिसका नेटवर्क बेरोक-टोक संचालित हो रहा है।
अब सवाल यह उठना लाज़मी है कि क्या इन सटोरियों को किसी राजनीतिक या प्रभावशाली संरक्षण का कवच प्राप्त है, या फिर सिरगिट्टी पुलिस की प्राथमिकताओं में सट्टा अपराध शामिल ही नहीं है?
जब सिविल लाइन पुलिस कार्रवाई कर सकती है, तो सिरगिट्टी में कानून को मानो लकवा क्यों मार गया है?
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा सट्टा सिंडिकेट में शामिल अन्य सटोरियों और खाईवालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जरूर दिए गए हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह बताती है कि कार्रवाई की रफ्तार थाना बदलते ही धीमी पड़ जाती है।अब देखने वाली बात यह होगी कि बिलासपुर पुलिस इन खुलेआम “ओपन चैलेंज” दे रहे सटोरियों पर कब और कैसी कार्रवाई करती है, या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा।

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