बिलासपुर 19 मई 2026।बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र में इन दिनों एक “बहुचर्चित नेता जी” की कहानी चाय की दुकानों से लेकर गलियों तक बड़े दिलचस्प अंदाज़ में सुनाई जा रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह कहानी विकास, जनता और सेवा की नहीं, बल्कि कथित तौर पर “नशे के नेटवर्क” और उसके संरक्षण की चर्चाओं से जुड़ी बताई जा रही है।सूत्रों की मानें तो नेता जी का पुराना रिश्ता उस कारोबार से रहा है, जिसके खिलाफ मंचों पर भाषण देकर वे आज समाज सुधारक बनने का दावा करते हैं। इलाके में लोग तंज कसते हुए कहते हैं ,“नेता जी ने कारोबार छोड़ा नहीं, बस खुदरा से ठेका सिस्टम में अपग्रेड हो गए!”बताया जाता है कि नेता जी अब सीधे मैदान में उतरने के बजाय संरक्षण की राजनीति में विश्वास रखते हैं। चर्चा है कि उनके करीबी लोग इलाके में खुलेआम नशे का धंधा चलाते हैं और आम जनता डर व खामोशी के बीच सब कुछ देखती रहती है।
इलाके में यह भी फुसफुसाहट है कि नेता जी खुद नशे के इतने शौकीन हैं कि शायद इसी “अनुभव” के कारण उन्हें कारोबारियों की तकलीफें अच्छी तरह समझ आती हैं। कुछ लोग तो मजाक में कहते हैं कि सरकंडा में नशे के कारोबार की “ब्रांड एम्बेसडरशिप” अब राजनीतिक संरक्षण के बिना अधूरी मानी जाती है।
हालांकि सरकंडा पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और कई छोटे कारोबारियों पर शिकंजा भी कस चुकी है, लेकिन सवाल वहीं खड़ा है आखिर बड़े संरक्षणदाता अब तक कानून की पकड़ से दूर क्यों हैं? क्या पुलिस वहां तक पहुंच नहीं पा रही, या फिर पहुंचना नहीं चाहती?जनता के बीच अब यह चर्चा तेज हो चुकी है कि जल्द ही नेता जी के कथित कारनामों और भ्रष्टाचार की परतें खुल सकती हैं। लोग इंतजार में हैं कि आखिर कब “जनसेवा” के चेहरे से पर्दा हटेगा और सामने आएगी असली कहानी।जल्द ही अगले अंक में हम नेता जी करतूतों का बड़ा खुलासा करेंगे,फिलहाल सरकंडा की जनता बस यही कह रही है,
“यहां नशे से ज्यादा खतरनाक उसका राजनीतिक संरक्षण है।”
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