Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

Responsive Advertisement

हर गांव में बनेगा बाल सुरक्षा का सुरक्षा कवच, ग्राम स्तर पर गठित होंगी सतर्कता समितियां...

आशा ठाकुर की रिपोर्ट कोरबा/रायपुर 01 अक्टूबर 2026।कोरबा जिले में बालिका के साथ हुए गंभीर अनाचार और उसकी मृत्यु की घटना को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने गंभीरता दिखाई है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने प्रभावित परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं व्यक्त कीं और परिवार की वर्तमान परिस्थितियों की जानकारी ली,उन्होंने संबंधित अधिकारियों को परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने तथा संवेदनशीलता के साथ उनकी देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

डॉ. शर्मा ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी को परिवार के निरंतर संपर्क में रहने और परिवार के अन्य बच्चे की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए आवश्यक शैक्षणिक एवं विधिक सहायता उपलब्ध कराने कहा,साथ ही बच्चे की सुरक्षा, देखभाल और भविष्य को लेकर नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया में परिवार की गरिमा और गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाए।

गांव-गांव में बनेगी बाल संरक्षण एवं सतर्कता समिति

बच्चों के विरुद्ध बढ़ते अपराधों पर चिंता जताते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण देना केवल परिवार नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बदलती सामाजिक परिस्थितियों और एकल परिवारों के बढ़ते चलन के बीच सामुदायिक निगरानी एवं सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।

इसी दिशा में आयोग ग्राम एवं पंचायत स्तर पर 'ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण एवं सतर्कता समिति' गठित करने की पहल करेगा,इसके लिए संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय कर प्रस्ताव तैयार किया जाएगा,समितियों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक, पंचायत प्रतिनिधि, महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाएं और जिम्मेदार नागरिक शामिल किए जाएंगे।

इन समितियों का उद्देश्य बच्चों से जुड़े संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान करना, जरूरतमंद बच्चों को सरकारी सहायता से जोड़ना तथा किसी भी संदिग्ध स्थिति या सुरक्षा संबंधी खतरे की सूचना तत्काल पुलिस और प्रशासन तक पहुंचाना होगा,उन्होंने स्पष्ट किया कि समितियां केवल जागरूकता, सहयोग और सूचना देने का काम करेंगी,जांच एवं कानूनी कार्रवाई सक्षम एजेंसियां ही करेंगी।

पीड़ित बच्चों की पहचान उजागर करना कानूनन प्रतिबंधित

डॉ. शर्मा ने मीडिया और नागरिकों से अपील की कि बाल अपराधों से जुड़े मामलों में पीड़ित की पहचान, तस्वीर, नाम, पता अथवा परिवार से संबंधित जानकारी सार्वजनिक न करें,उन्होंने पॉक्सो अधिनियम की धारा 23 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों की गरिमा और गोपनीयता की रक्षा करना सभी का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि बाल सुरक्षा किसी एक विभाग का काम नहीं, बल्कि परिवार, समाज, प्रशासन और प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। लक्ष्य है कि हर बच्चा सुरक्षित रहे, उसकी पढ़ाई बाधित न हो और उसे सम्मान के साथ भयमुक्त बचपन मिल सके।

Post a Comment

0 Comments